ऐश्वर्या राय बच्चन बर्थडे स्पेशल: जानिए एक्ट्रेस के 5 बेहतरीन लेकिन अंडररेटेड रोल

ऐश्वर्या राय बच्चन अपना जन्मदिन मना रही हैं। जानिए उनके करियर के 5 ऐसे अंडररेटेड रोल के बारे में जिन्होंने उनकी अभिनय क्षमता को साबित किया।

by NEHA RAJPUT

ऐश्वर्या राय बच्चन बर्थडे स्पेशल: जानिए एक्ट्रेस के 5 बेहतरीन लेकिन अंडररेटेड रोल

बॉलीवुड की खूबसूरत और दिग्गज अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। साल 1997 में अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाली ऐश्वर्या ने अपनी खूबसूरती, बुद्धिमत्ता और शानदार अभिनय से हमेशा दर्शकों का दिल जीता है। उन्होंने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं, लेकिन कुछ ऐसी फिल्में भी हैं जो धूम 2 या जोधा अकबर जितनी चर्चा में नहीं रहीं, लेकिन उनमें उनके अभिनय की गहराई साफ दिखाई देती है। आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं उनके ऐसे ही 5 अंडररेटेड और खास किरदारों के बारे में।

और प्यार हो गया (1997)

यह फिल्म ऐश्वर्या राय बच्चन की बॉलीवुड डेब्यू फिल्म थी, जिसमें उनके साथ बॉबी देओल नजर आए थे। इसमें उन्होंने 'आश' नाम की एक युवा लड़की का किरदार निभाया था, जिसकी जिज्ञासा उसे प्यार और खुद की तलाश के सफर पर ले जाती है।

जोश (2000)

इस फिल्म में ऐश्वर्या ने शाह रुख खान के साथ स्क्रीन शेयर की थी, जहाँ उन्होंने उनकी बहन शर्ली की भूमिका निभाई थी। उनका यह किरदार चार्म और चंचलता से भरपूर होने के साथ-साथ आत्मविश्वास और मजबूती से भरा हुआ था।

रेनकोट (2004)

ऋतुपर्णो घोष की फिल्म 'रेनकोट' में ऐश्वर्या राय बच्चन का एक बेहद संवेदनशील और नायाब अभिनय देखने को मिला। अजय देवगन के साथ इस फिल्म में उन्होंने नीरजा का किरदार निभाया, जो किस्मत की वजह से बिछड़ जाते हैं। इस फिल्म में ऐश्वर्या ने ग्लैमर से दूर रहकर अपनी सादगी और मजबूत अभिनय का परिचय दिया।

ब्राइड एंड प्रेज्यूडिश (2004)

जेन ऑस्टेन के 1813 के उपन्यास 'प्राइड एंड प्रेज्यूडिश' पर आधारित इस फिल्म में ऐश्वर्या ने अमृतसर की रहने वाली ललिता बक्शी का किरदार निभाया। फिल्म का एक यादगार सीन वह है जब ललिता पश्चिमी रूढ़ियों के खिलाफ अपने देश का बचाव करती हैं और भारत के बारे में बात करती हैं।

द मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेंज (2006)

इस फिल्म में ऐश्वर्या ने टिलो नाम की एक महिला की भूमिका निभाई थी, जो सैन फ्रांसिस्को में मसालों की एक दुकान चलाती है और लोगों के जीवन को ठीक करने के लिए मसालों का इस्तेमाल करती है। कर्तव्य और इच्छा के बीच उलझी इस महिला के आंतरिक संघर्ष को फिल्म की कहानी का मुख्य हिस्सा बनाया गया है।

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