बॉलीवुड में बदली फिल्मों की शूटिंग, इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की बढ़ रही है मांग
बॉलीवुड फिल्मों में अब इंटीमेट सीन्स के लिए इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर की मदद ली जा रही है, जिससे कलाकारों की सुरक्षा और सहमति सुनिश्चित हो सके।
by NIDHI JANGIR
बॉलीवुड में फिल्मों की शूटिंग का तरीका धीरे-धीरे बदल रहा है। अब फिल्मों और वेब सीरीज में इंटीमेट सीन्स को शूट करने के लिए प्रोफेशनल्स की मदद ली जाने लगी है, जिन्हें इंटीमेसी कोऑर्डिनेटर कहा जाता है। इनका मुख्य काम कलाकारों की सुरक्षा और उनकी सहमति सुनिश्चित करना होता है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का प्रभाव
जैसे-जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बोल्ड और रियलिस्टिक कहानियां बन रही हैं, वैसे-वैसे सेट पर ऐसे कोऑर्डिनेटर की जरूरत भी महसूस होने लगी है। #MeToo मूवमेंट के बाद मनोरंजन जगत में सुरक्षा के कड़े मानक तय किए गए हैं, जिसके बाद से फिल्ममेकर्स इस दिशा में गंभीर हुए हैं।
कैसे काम करते हैं कोऑर्डिनेटर
आस्था खन्ना जैसे कोऑर्डिनेटर सेट पर यह तय करते हैं कि सीन के दौरान किस तरह से शूटिंग होगी। स्टंट डायरेक्टर की तरह ही वे पहले से ही सीन की पूरी रूपरेखा तैयार कर लेते हैं ताकि कलाकारों को किसी भी असहजता का सामना न करना पड़े। शूटिंग के दौरान क्रॉच गार्ड, निप्पल पास्टी और कुशन जैसे मॉडस्टी टूल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कलाकारों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहती है।
फिल्में और कलाकारों की राय
साल 2022 में रिलीज हुई फिल्म 'गहराइयों' इस दिशा में एक बड़ा कदम थी, जिसमें इंटीमेसी डायरेक्शन और वर्कशॉप का इस्तेमाल किया गया था। 'मिर्जापुर' जैसे क्राइम ड्रामा में काम करने वाली अभिनेत्री रसिका दुगल का कहना है कि ऐसे प्रोफेशनल्स के होने से कलाकारों की चिंताओं का सही ध्यान रखा जाता है और किसी भी तरह की असहजता से बचा जा सकता है। हालांकि, अभी भी कई कमर्शियल फिल्मों में इनका इस्तेमाल नहीं होता है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे कलाकारों को मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा मिलती है।
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