बॉलीवुड में बच्चों की फिल्मों का अकाल क्यों? मड़ी और तारे ज़मीन पर के बाद क्या बदला
बॉलीवुड में बच्चों की फिल्में क्यों गायब हो रही हैं? जानिए मड़ी और तारे ज़मीन पर के बाद मेकर्स ने बच्चों की फिल्मों से क्यों बनाई दूरी।
by NEHA RAJPUT
फिल्मी इतिहासकार अक्सर पचास और साठ के दशक को भारतीय सिनेमा का स्वर्ण काल मानते हैं, जब फिल्मकारों ने व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर प्रयोग किए थे। इसी तरह नब्बे के दशक के अंत से लेकर दो हज़ार दस के शुरुआती दौर को भारत में बच्चों की फिल्मों का बेहतरीन दौर कहा जा सकता है। उस दौरान विशाल भारद्वाज ने मड़ी और द ब्लू अंब्रेला से शुरुआत की थी। अनुराग कश्यप ने रिटर्न ऑफ हनुमान बनाई थी। यशराज और धर्मा प्रोडक्शंस ने भी बच्चों के लिए कई फिल्में बनाई थीं।
क्यों गायब हो गईं बच्चों की फिल्में
आज स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। बड़े स्टार्स अब बच्चों की फिल्मों में काम नहीं करते हैं। एनिमेशन इंडस्ट्री में अब केवल पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्में ही बन रही हैं। फिल्मकार कौशल ओझा, जिन्होंने लिटिल थॉमस फिल्म बनाई है, बताते हैं कि उन्हें इसके लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। लोग अब बच्चों की फिल्मों को लेकर जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं और वितरक यह पूछते हैं कि बच्चों की कौन सी फिल्म चलती है।
बच्चों की पसंद में आया बदलाव
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि आज के बच्चे पुष्पा और सिंघम जैसी फिल्में देखना पसंद करते हैं। बच्चे अब बड़ों की तरह एक्शन और कमर्शियल फिल्मों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा, सरकारी संगठन चिल्ड्रेन्स फिल्म सोसाइटी का राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम में विलय होने से भी संस्थागत समर्थन में कमी आई है।
स्टार पावर की कमी
पहले आमिर खान ने तारे ज़मीन पर और अमिताभ बच्चन ने भूतनाथ जैसी फिल्मों में काम किया था, जिससे बच्चों की फिल्मों को स्टार पावर मिलती थी। लेकिन अब निर्माता तभी हाथ डालते हैं जब कोई बड़ा नाम जुड़ा हो। कम बजट में ऐसी फिल्में बनाना अब एक नया विकल्प बचा है, ताकि सिनेमा की गुणवत्ता बनी रहे।
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