वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर कब बदलना चाहिए, जानें कैसे पहचानें संकेत
वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर समय पर बदलना जरूरी है। जानें पानी के स्वाद, बहाव और टीडीएस में बदलाव से जुड़े मुख्य संकेत।
by NEHA RAJPUT
सुबह उठते ही पानी पीने से लेकर चाय बनाने और खाना पकाने तक, घर में कई कामों के लिए वॉटर प्यूरीफायर से निकलने वाले पानी का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादातर लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि प्यूरीफायर ठीक से काम कर रहा है या नहीं, लेकिन उसके अंदर लगे फिल्टर की हालत पर नजर रखना भूल जाते हैं।
फिल्टर खराब होने पर क्या होता है?
पानी में मौजूद मिट्टी और जंग के बारीक कणों को रोकते-रोकते फिल्टर की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसकी वजह से पानी का स्वाद बदल सकता है, उसकी सप्लाई धीमी हो सकती है और सफाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। समय रहते फिल्टर न बदलने पर प्यूरीफायर के दूसरे हिस्सों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिल्टर बदलने का सही समय
फिल्टर की उम्र उसके प्रकार और पानी की गुणवत्ता के हिसाब से अलग होती है। सेडिमेंट फिल्टर को 3 से 6 महीने, कार्बन फिल्टर को 6 से 12 महीने, RO मेम्ब्रेन को 12 से 24 महीने और UF फिल्टर को लगभग 12 महीने में बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सही समय जानने के लिए हमेशा प्यूरीफायर के मैनुअल को प्राथमिकता दें।
फिल्टर बदलने की जरूरत को ऐसे पहचानें
- पानी का स्वाद या गंध बदलना: यदि पानी का स्वाद नमकीन या मिट्टी जैसा हो जाए और अजीब गंध आए, तो कार्बन फिल्टर की जांच कराएं।
- पानी का बहाव धीमा होना: प्यूरीफायर से गिलास भरने में ज्यादा समय लगे, तो फिल्टर में गंदगी जमा हो सकती है।
- पानी का धुंधला दिखना: पानी में छोटे कण दिखना या रंग धुंधला होना फिल्टर की क्षमता प्रभावित होने का संकेत है।
- TDS का बढ़ना: साफ पानी का टीडीएस बढ़ने पर आरओ मेम्ब्रेन की जांच करानी चाहिए।
- सर्विस अलर्ट मिलना: कई आधुनिक प्यूरीफायर में फिल्टर बदलने के लिए इंडिकेटर लाइट जलती है।
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