दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अपनी फिल्मों और दमदार अभिनय के लिए हमेशा जाने जाते हैं। लेकिन पर्दे की चकाचौंध से दूर उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा बेहद निजी रखा, खासकर अपनी पत्नी नीलकंती पाटेकर के साथ रिश्ते को।
कौन हैं नीलकंती पाटेकर?
नाना और नीलकंती की मुलाकात कथित तौर पर मराठी थिएटर के जरिए हुई थी। उस समय नीलकंती एक बैंक अधिकारी के रूप में काम कर रही थीं और साथ ही अभिनय में भी अपनी दिलचस्पी बनाए हुए थीं। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती रिश्ते में बदल गई और साल 1978 में दोनों ने शादी कर ली। शुरुआती सालों में उन्हें एक बड़ी निजी त्रासदी का सामना करना पड़ा जब उनके ढाई साल के पहले बच्चे का निधन हो गया। बाद में उनके दूसरे बेटे मल्हार का जन्म हुआ। समय के साथ उनके रिश्ते में बदलाव आया और वे अलग-अलग रहने लगे, हालांकि वे कानूनी तौर पर शादीशुदा रहे।
IIT परीक्षा पास की लेकिन थिएटर को चुना
पुणे में जन्मीं नीलकंती ने फिजिक्स की पढ़ाई की थी। उनके पिता केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में थे, जिसके चलते उनका ट्रांसफर होता रहता था। पिता के कहने पर उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा दी और उसे पास भी कर लिया, लेकिन उन्होंने उस रास्ते को नहीं चुना। इसके बजाय उन्होंने थिएटर में अपनी रुचि को आगे बढ़ाया और मराठी थिएटर में एक सक्रिय कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाई।
अभिनय करियर और पुरस्कार
नीलकंती की प्रतिभा को शुरुआती दौर में ही पहचान मिल गई थी। साल 1973 में उन्होंने महाराष्ट्र राज्य नाट्य प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने मराठी सिनेमा में कदम रखा और 1989 में सचिन पिलगांवकर के निर्देशन में बनी फिल्म 'आत्मविश्वास' में उनके साथ काम किया। इस फिल्म के लिए उन्हें महाराष्ट्र राज्य सरकार के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
फिल्म 'छावा' से शानदार वापसी
अभिनय की दुनिया से लंबे समय तक दूर रहने के बाद नीलकंती ने विक्की कौशल और रश्मिका मंदाना स्टारर ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'छावा' से बड़े पर्दे पर वापसी की। इस फिल्म में उन्होंने धाराउ की भूमिका निभाई, जिससे उनके करियर को एक बार फिर से चर्चा मिल गई।
